#Physico #Brothers

इस कहानी की सुरुआत कुछ इस तरह से होती है-

1 NGO के द्वारा खोला गया सुधार गृह जिसमे लोग आ के अपने बारे मे, अपनी दुख दर्द, अपने गलत कामो पे पछतावे पर बाते करते है ओर खुद को बेहतर इंसान बनाने की कोशिश करते है ,उस कमरे में टेबल लैंप जल रही है,टेबल के चारो तरफ 3,4 खाली कुर्सियां भी पड़ी है 2 बुजुर्ग 60 ,70 साल के जो कि जेल से कुछ दिन पहले ही छूट कर आये है ,रोज की तरह अपने किये हुये कर्मो के बारे में बता रहे है, उन दोनों के पास में एक 16साल की लड़की बैठी है जो अपनी बड़ी बहन के साथ आई है एक नवजवान जो बैठा सुन रहा है बुजुर्ग लोग अपनी बातें बता ही रहे थे कि उस लड़की की बड़ी बहन बात काटते हुए बीच मे ही बोल उठी ……1 बुड्ढे ने देखा कि उसकी आँखें अंदर की ओर धसी हुई है आखों के चारो तरफ काला घेरा बना हुआ है बहोत परेसान ,होठ काप रहे जैसे कुछ जल्दी में बोलना चाह रही हो ,बाल उलझे हुए …. वो बोली कि – मैने ड्रग्स के नशे में आ के सब कुछ बर्बाद कर लिया , अपने हस्बैंड को मार दिया ,मेरा बच्चा मुझसे दूर रहता है मै ड्रग्स छोड़ना चाहती हु लेकिन अब मेरा शरीर इसका आदी बन चुका है मेरी बहन ही मेरा सहारा है ,आप सब लोगों के बाच आ के अपना दुख दर्द बाट लयेती हुं तो कुछ सुकून मिलता है …. ये बोल ही रही थी कि .. रूम का गेट खुलता है और एक

एक 25 साल का लड़का

ब्लैक सूट, टाई, स्मार्ट लुक के साथ पहोचता है सब उसको देख रहे हैं उसके चेहरे पर 2,3 कटे हुए के निशान पड़े हैं ,उसकी आँखें डरावनी है लाइट पड़ने पर ओर भी डरावनी हो जाती हैं जैसे किसी जानवर की होती है, वो प्यारी स्माइल के साथ बोलता है … हेल्लो एवरीवन मेरा नाम प्रभुज्योत है …प्रभुज्योत नंदा.. Next time…

कुर्शी पर बएठते हुए ,मैने भी कुछ गलतियां की है – ये मै नही लोग कहते है ,लोग कहते हैं कि 1 पागल सरफिरा सड़कों पर घूमता रहता है अपने भाई को ढूढ़ने के लिए, वो किसी तरह का बदला चाहता है , मेरा तो मानना है कि अगर गुनहगार को सरकार नही पकड़ पा रही तो हमे खुद पकड़ के सजा दे दएनी चाहिए, ये तरीका अपनाने से समाज मे गुनाह पनप ही नही पायेगा, सरकार तो सुरछित रहती है खतरा उसे नही खतरा तो हम आम लोगों को रहता है हर चीज से … टेबल के सामने बैठा नवजवान बोला कहीं तुम वही पागल तो नही जिसकी तुम बात कर रहे हो कि वो सड़कों पे घूमता है…. 16साल वाली लड़की बीच मे ही बोलती है कि – तुम लग भी कुछ वैसे रहे हो सीरियल किलर टाइप के, खैर मुझे लगता है इस तरह के किलर्स को और उनके परिवार को भी जेल में बंद कर देना चाहिए , जब बच्चे पाल नही सकते तो ऐसे सड़कछाप बच्चे पैदा भी नही करने चाहिए लोगों को…..

नंदा-रिस्पेक्ट मैडम रेस्पेक्ट से बात कीजिये ,जिनके बारे में जानती न हो आप ,कैसे इस तरह से बात कर सकती है बोलते बोलते होठ कापने लगते है ,वो हल्का डर के साथ अपना चेहरा पोछता है ओर नार्मल रहने की कोसिस करता है गहरी सांस ले के आराम से बोलता है कि लोगों को उस लड़के को समझना चाहिए ,उसे प्यार की जरूरत है अपनेपन की ,सम्मान की …. लड़की- सम्मान नही उसे तो जेल में होना चाहिए या किसी पागलखाने में,न्यूज़पेपर मैने भी पड़ा है जो इंसान अपने परिवार का न हो सका वो समाज का क्या होगा…/

नंदा साहब अपनी कुर्सी से उठते हैं ओर उस लड़की को समझाते हुए उसकी तरफ आते है – देखो बेटा समाज मे अच्छे बुरे हर तरह के लोग होते हैं कोशिश करनी चाहिए कि बुरे लोगों की बाते समझी जाए ओर उनको अच्छा इंसान बनने का बेहतर अवसर दिया जाए , नंदा साहब लड़की की कुर्सी के पीछे खड़े हो कर- लेकिन उससे पहले उन लोगों का सम्मान करना सीखना होगा, -नंदा साहब का चेहरे गुस्से से भर गया अचानक से बोले-बत्तमीजी लड़की तुझे पता नही है कैसे रेस्पेक्ट से बात की जाती है, ओर चाकू अपनी पैंट की पॉकेट से निकाल के उसके गर्दन में घुसेड़ देता है

खून की धाराएं बहने लगती है लड़की के मुह से खून के गुब्बारे फुट रहे है सर की सारी नसे तनी जा रही है हरी हरी मोटी- पतली नसे दिखाई दे रही हैं / नंदा- मै ही हूं वो सड़कछाप पागल , जिसके बारे में तुम सब लोग इतनी देर से बकवास कर रहे हो ,ये सुनते ही संस्था का नोकर गेट बंद कर के भागता है ,अंदर दोनो बुजुर्ग की आँखें फटी जा रही हैं नंदा को दयेख दयेख कर ,तनी हुई गोल-गोल बूढी आखों की पतली- पतली लाल- लाल नसें साफ दिख रही थी, चेहरे पे मौत का सामना करने की हिम्मत बिल्कुल भी नही थी ,वो दोनों बुजुर्ग जान गए थे कि अब समय आ गया है मरने का, आँखें बंद होने का नाम ही नही ले रही , कुछ ही सेकंड में चाकू की आवाज बाहर तक तेजी से सुनाई देती है ओर उस आवाज के पीछे कई चीख पुकारें भी सुनाई देती हैं जो कि धीरे धीरे बन्द हो जाती हैं ,बन्द गेट पर लात मार के वुडलैंड के काले ,चमकते हुए लम्बे नोक वाले जूतों के साथ नंदा बाहर आता है ओर चाकू रुमाल से पोछते हुए ,पॉकेट में रखते हुए ,हाथ साफ करते हुए, खून से लगा हुआ रुमाल फेकता है और बोलता है- लोग शुधरने ही नही दएते…../ Next time…

1 Ophthalmologist (आँख की सर्जरी का जानकार ) एप्रेन पहने हुए, स्टेथॉस्कोप (Stethoscope) या परिश्रावक रोगी के रक्तसंचार की दशा का परीक्षण करने का उपकरण गले में लटकाये हुए,

एक हाथ मे 1 पर्चा लिए हुए और दूसरे हाथ मे कुछ फाइल्स लिए हुए किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ रहा है जो पर्चे पे लिखा एड्रेस बता दे, इसी खोज में वो चाय की दुकान पे पहोचता है धूप तेज होने की वजह से फाइल्स को सर पे रखते हुए ,वहां बैठे 1 व्यक्ति, जिसके सर पे बाल नहीं है ,जो कि व्हाइट शर्ट ,थोड़ी फटी हुई पैंट पहने हुए है ,पैंट की ज़िप खुली हुई, को पर्चा दिखा के पूछता है कि भाई साहब ये अड्र्स बता दएँगे ,भाईसाहब अड्र्स देखते हैं, डॉक्टर साहब का चेहरा देखते है फिर एड्रेस पढ़ता है और इसारे में हाथ ऊँचा कर के उंगली से बताने की कोसिस कर रहा है , चाय वाला ये देख के मुस्कुरा रहा है ,बोलता है कि –आरे आओ डॉक्टर साहब चाय पीलो,

लाओ हम बता दें एड्रेस ,बेचारा गूँगा है वो रोज आता है सबको 6 रु.की देता हूं चाय ये 2 रु. ही देता है ।,एड्रेस बताने के बाद, चाय वाला- तव साहब आप का ट्रांसफर हिये हुआ है का ? डॉ.-हाँ जोइनिंग तो 2 दिन बाद है लेकिन अभी सेटलमेंट करने में ही टाइम लग जायेगा थोड़ा, चाय की गुमटी में बएथे 2 लोग बाते कर रहे थे, 1 ने डॉक्टर को देख कर बैठने के लिए बोला और एप्रेन पे लगा बैच देख कर नाम पढ़ने की कोशिस करता है- डॉ आर. नंदा , पढ़ कर बोलता है- सर् आप आँख के स्पेसलिस्ट हैं ना, डॉक्टर ने उसको देखा-उसकी आँखें ब्राउन रंग की ,जैसे किसी जानवर की हो, डॉ.जी हाँ, व्यक्ति-सर् क्या मेरी आँखें सही हो सकती है ,कुछ लेन्स वगेरा लगवा दीजिये रात में जानवरों जैसी आँखें लगती है लाइट पड़ने पर,डॉ.- ठीक है आज शाम को आजाइये मेरे घर, घर मे ही छोटा सा क्लीनिक है ,तुम्हारी आँखें सही हो जाएंगी , तभी चाय की कुटिया में लगी टीवी में न्यूज़ पर ध्यान जाता है कि –1 दिन पहले हुए एनजीओ में कत्लेआम में लगभग 5 लोगों की हत्या की खबर पर स्थानीय लोगों और पुलिस ने हामी भरी है वहां के चपरासी का केहना है कि वो व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था, पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने के लिए बोला है , लोग काफी डरे हुए है , पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है ओर इस मामले की……. लाइट चली जाती है , ये सुनते ही डॉक्टर साहब हड़बड़ी में वहां से पैसे दे कर निकलता है और,बड़बड़ाता है कि पता नही मेरा छोटा भाई कहाँ है?कितना हैंडसम हो गया होगा अब ,बहोत साल बीत गए उसको देखा नही …… और चला जाता है वहां से

शाम का वक्त है , सूरज लगभग डूब ही चुका है डॉक्टर साहब के रूम में 3,4 आँख की तस्वीरें तंगी हुई , 1 चम्मच फर्स पर गिर हुआ, कुछ A 4 साइज के पेपर पड़े हुए , पेसेंट की आँख वाली इंस्टूमेंट टेबल साफ सुधरा कपड़े से ढकी हुई है,कुछ आँख की तस्वीरें दीवाल पर बनी हुई , डॉक्टर साहब 1 A4 साइज के पेपर पर पेंसिल से आँख बना रहे हैं

फिर ,बीच बीच में 1 हाथ से बियर का महँगा वाला ग्लॉस उठा के बियर की चुस्की ले रहे है , और कभी कभार बड़ी-गोल्ड का धुवाँ भी ।

बहोत ही रूहानी,बहोत धीरे धीरे ओर लंबी तान के साथ ,दिल को छू जाने वाला, ओपेरा सॉन्ग बज रहा है जो कि बिल्कुल भी समझ नही आ रहा है , पूरे माहौल में नशा चढ़ा हुआ है व्हाइट शर्ट ,ऊपर के 2 बटन खुले हुए ,शर्ट के बाहर से ही अंदर की बनयान चमक रही है ओर गोरा गोरा ज़िस्म भी जैसे कि बियर के समुन्दर से नहा कर निकले हो, धीरे धीरे ओपेरा फ़ास्ट होता जाता है ,डोर बेल बजती है लेकिन डॉक्टर साहब आँख की स्क्रेटचिंग में बिजी हैं हो भी क्यों न आखिर-कार आँख के डॉक्टर है , धीरे धीरे डॉक्टर के चेहरे पर गुस्सा आने लगती है वो जल्दी जल्दी स्क्रेटचिंग करने लगता है ,गुस्सा ओर तेज होता है स्क्रेटचिंग ओर तेज हो जाती है ,ओपेरा ओर भी तेज बजने लगता है ,डोरबेल की आवाज सुनाई देना बन्द हो जाती है , अचानक डॉक्टर चिल्लाता है- कहाँ है मेरा भाई, ओर जोर जोर से पेपर पर पेंसिल मारता है , पेपर फट रहा है पेंसिल टूट गयी है ,ओपेरा ओर भी तेज बज रहा है अचानक से सब शान्त।

डॉक्टर रुक जाता है अचानक से ,अचानक ही ओपेरा रुक जाता है , रूम में बिल्कुल शांति का माहौल है ।

तभी डोरबेल बजती है – डॉक्टर खुद को संभालता है मुस्कुराता है ,शर्ट सही करता है फटे पेपर को कूड़ेदान में डालता है ओर गेट खोलता है ताजगी ओर मुस्कुराहट के साथ ,पेन्सिल वाला हाथ काँप रहा है ओर लाल पड़ गया है

गेट खोलते ही , -डॉक्टर साहब पहचाने? आज सुबह चाय की दुकान पर मिले थे आप से ,आँख सही करवाने के बारे में बातें हुई थी, डॉ नंदा- हा आईये , टेबल की तरफ इशारा करते हुए, आँखें पानी से धुल कर लेट जाइए टेबल पर, पेसेंट रूम देख कर बोलता है सर आप तो बहोत क्रिएटिव लग रहे हैं काफी अच्छी पेंटिंग्स बना लयेते है ,डॉ मुस्कुराता है ,और इंस्टूमेंट बॉक्स से कुछ इंस्ट्रूमेंट निकालता है,टेबल के पास रखी कुर्सी पर बएथे जाता है वहीं पास में 1 और इंस्ट्रूमेंट बॉक्स रखा है ,

डॉ नंदा- तो आप की आँखें कब से खराब हैं?

पेसेंट- सर जन्म से ही खराब है

डॉ नंदा- किसी और को जानते हो जिसकी आँखें तुम्हारी जैसी हों?

पेसेंट- नहीं सर

डॉ- पता है मेरा 1 भाई है ,खो गया है, बहोत हैंडसम हो गया होगा अब तो, ये बोलते बोलते आँखें भी साफ कर रहा है पेसेंट की , तुम्हारे जैसी ही उसकी आँखें थी ,तुम सच मे नही जानते उसको ?

पेसेंट-अरे सर मए कैसे जानूँगा उसको/

डॉ- थोड़ा अगग्रेसिवे होते हुए- तुम भी उसके जैसे बेगुनाह हो ,तुम्हारी आँखें उसकी जैसी है टीम भी उसके जैसे ही होंगे मए तुम्हारी आँखें निकल लूंगा नफरत है मुझे इन आँखों से…बीच में ही पेसेंट उठते हुए/

अरे ये क्या बकवास है हटिये मुझे नही कराना इलाज आप से

डॉ कुर्सी से उठ कर उसकी टेबल के ऊपर पैर रख कर उसके ऊपर बैठ जाता है ओर टेबल के नीचे लटकती हुई रस्सी से उसके हाथ बाँध देता है ,डॉ टेबल को इतनी ऊची कर दयेत है कि पेसेंट के पैर फर्स पर न पड़ें,

डॉ अब दूसरा इंस्ट्रूमेंट खोलता है

उसमें से प्लास निकलता है , और म्यूजिक ओन कर देता है , डॉ के हाथ काँप रहे हैं होठ थरथरा रहे हैं वो कुछ इधर उधर ढूंढ रहा है 1 चाय वाली पन्नी मिलती है उसको उठा कर जेभ में रख लेता है , अभी भी पागलों की तरह बड़बड़ाते हुए जल्दी जल्दी कुछ ढूंढ रहा है ,पेसेंट चिल्ला रहा है ,मुझे नही कराना इलाज़ जाने दो मुझे, देखो ये जो कर रहे हो तुम वो अच्छा नही कर रहे हो , इस शहर के मेयर मुझे जनता है मेरा दोस्त है वो….. डॉ बीच में ही सी सी…… होठ पे उंगली रखते हुए आता है ओर शांति से बोलता है कि डोंट डिस्टर्ब योर डॉक्टर, अभी इलाज़ कर रहा हु न तुम्हारा, आँखें सही हो जाएंगी तुम्हारी, मै कुछ ढूंढ रहा हु मिल ही नही रहा, अचानक उसकी नजर फर्स पर जाती है वो चम्मच देखता है

ओर हस्ते मुस्कुराते हुए – अरे तुम यहां थे मए कहाँ कहाँ तुमको ढूंढ रहा था ,चम्मच से बोलता है / चम्मच उठा कर, दूसरे हाथ में प्लास ले कर पेसेंट के ऊपर बैठ कर बोलता है ,शांत हो जाओ डॉ से डरो मत, ओपरा बज रहा है पेसेंट धीरे धीरे रोना सुरु करता है ओर बोलता है सर प्लीज जाने दीजिए , डॉ पेसेंट को समझते हुए – देखो इलाज़ करते टाइम हिलना मत , ओर प्लास से आँख की पुतली पकड़ने की कोसिस करता है , पेसेंट खुद को बचाने के लिए अपना चेहरा इधर उधर हिलाता है ओर चीखता है लेकिन ओपरा की आवाज अब तक काफी तेज हो चुकी थी , डॉ चम्मच ,प्लास रख देता है ओर पेसेंट के सीने पर बएथे कर दोनों घुटनों से सर दबा देता है

प्लास उठा कर आँख की पुतली ऊपर करता है और चम्मच उठा कर आराम से चम्मच आँख में घुसेड़ देता है और घुमा कर आँख बाहर निकालने लगता है ,पेसेंट के दोनों हाथ फैले हुऐ है

वो चीख रहा है ओर चिल्ला रहा है ,समझ चुके है कि कुछ नही फायदा अब रोने चिल्लाने का आवाज सुख गयी है उसकी ओपरा और तेज बज रहा है हाथ काँप रहे है ,फड़फड़ा रहे है पैर की उंगलियां पूरी तरह से दबा कर दर्द ओर घिनोनेपन को सहने की कोसिस कर रहा है डॉ जेभ से चाय वाली पन्नी निकालता है और आँख को पन्नी में डाल देता है इसी तरह दूसरी आँख में भी चम्मच डाल कर आँख निकाल लेता है और आँखों पर पट्टी बांध देता है पट्टी के ऊपर भी खून लग जाता है,

ओर पन्नी में डाल कर एक पतली रबरबैंड से बांध देता है म्यूजिक बन्द हो जाता है पेसेंट के हाथ पैर हिलना बन्द हो जाते है सिर्फ 1 उंगली हल्का हल्का सा हिल रही है वो भी बंद हो जाती है हिलना /

पेसेंट अचेत अवस्था में चला जाता है ,डॉ लुब्रिकेटेड आखों को जो कि 1 पन्नी में रखी हुई है ,ले कर 1 आइस बॉक्स में डाल देता है / NEXT TIME….

चमचमाती हुई धूप में , सदियों पुरानी रोड जो कि जगा जगा गड्ढों से भरी है 1 पुलिस वाला खाकी वर्दी पहने हुए हाथ मे फ़ाइल लिए हुए ,सर्विलांस पर बाते करते हुए

,रोड पर मौजूद कूडा- करकट से बचते हुए 1 ढाबे पर पहोचता है वोह 1 टेबल की तरफ फ़ाइल ले जा रहा है जहां 2 नवजवान बैठे हुए है ,ओर बाते कर रहे है कि अपराधी चाहे जितना ही शातिर क्यों न हो कोई न कोई शुराग छोड़ ही जाता है ….. बीच मे ही पुलिस वाला बोलता है ,विनायक सर ये लीजिये फ़ाइल नया केस आया है आप के पास ,

विनायक- पुलिस वाले को देख कर ,अरे यादव जी आईये खाना खा लीजिये आज तुम्हारी भाभी ने भरवा करेले की सब्जी बनाई है ।

पुलिस(यादव जी)- सर बिल्कुल अभी लंच कर के निकला हूं। ऊपर से आर्डर आया था कि ये केस अब सीबीआई को सौप दिया जाए तो सोचा फ़ाइल दे दू चल के आप को।

विनायक- क्या है केस ? ये पूछते हुए फ़ाइल अपने सामने वाले जॉन अब्राहम जैसी बॉडी वाले बंदे को दे देता है

यादव जी- कुछ दिनों से शहर में खून खराबा बहोत बढ़ गया है, सुनने में आया है कि 2 सरफिरे हैं पिछले 25 दिनों में 18 लोगों को मार चुके हैं , बाकी डिटेल्स फ़ाइल में दी हुई है ,अभी चलता हूं।

विनायक- रुको, इनसे मिलो ये है हमारी टीम के नए सदस्य प्रमोद, फील्ड पे बहोत एक्टिव रहता है ये लड़का ।

यादव जी- चलिए देखते है ,प्रमोद जी नया केस मुबारक हो।

प्रमोद- मुस्कुराता है

(प्रमोद – बहोत ही एग्रेसिव- बहोत ही ज्यादा अग्रेसिव, उम्र-29 साल, छाती पर गोली का 1 निशान, सर पर छोटे बाल ,काली मुछे, दमदार पर्सनैलिटी ,भारी आवाज )

विनायक – प्रमोद फ़ाइल ले कर घर चले जाओ ओर कल डिटेल में बताना स्टोरी इस केस की/

प्रमोद-ओके सर

विनायक सिगरेट निकालता है ओर ढाबे के पीछे जा कर पीने लगता है , पसीने की बूंदे निकल रही है, रुमाल निकाल कर चेहरा साफ करता है और मोबाइल निकाल कर वाइफ को कॉल करता है – आज डिनर बाहर करते है , 1 नया केस मिला है ,बस ये लास्ट है ,

वाइफ-कितनी बार बोला है अब रहने दो ,थोड़ा घर परिवार की तरफ भी ध्यान दे दो ,आखिर किसके लिए इतनी मेहनत कर रहे हो …..

विनायक- बस ये लास्ट है

नेक्स्ट डे-सीबीआई आफिस- प्रमोद विनायक से-सर जिस बंदे ने NGO में लोगों को मार था वहां के चपरासी ने बताया कि वो नार्मल लड़के जैसा दिखता है ओर बात बात में ही गुस्सा हो जाता है नाम तो नही पता चला लेकिन इससे पहले भी वो कुछ लोगों को मार चुका है , अब तक 17 लोगों को मारा है इसने वहीं दूसरी तरफ जिस पेसेंट की आँख निकाली गयी है उसकी हालत बहोत खराब है -डॉ नंदा नाम पता चला है ,पेसेंट की आखों में गहरा घाव है बहोत डरा हुआ है बार बार बेहोश हो रहा है /

विनायक- मेरा लैपटॉप लो और शहर में जितने हॉस्पिटल हैं सबके डॉक्टर लिस्ट चेक करो ,डॉ नंदा को मार्क करो । फिर NGO चल कर सबूत धुनते हैं। Next time……

शहर से 63 किलोमीटर की दूरी पर विश्णुपुर नाम का छोटा सा 1 कस्बा है ,लंबी यात्रा करने के बाद प्रभजोत वहाँ के सरकारी हॉस्पिटल में जा कर डॉ मिश्रा से मिलता है और पूछता है कि भाई कहाँ है – डॉ मिश्रा बैठो , बहोत गलती की है तुम्हारे भाई ने इस हॉस्पिटल में मुझे कुछ समझ नही आ रहा आखिर इतना अच्छा डॉक्टर होने के बावजूद 1 पेसेंट के साथ ऐसा कैसे कर सकता है वो

क्या हुआ भईया- डॉ मिश्रा तुमको तो पता ही है कि मए तुम्हारे भाई का अच्छा दोस्त हुं ,बचपन से ही साथ रहा हूँ उसके उसके बावजूद उसने मुझे बताये बगैर ही इस्तीफा दे दिया और चला गया कहीं।

प्रभुजोत- कुछ तो हुआ होगा ?

डॉ मिश्रा- हाँ 1 गलती हो गयी उससे , 1 पेसेंट आया था आँख का चेकअप कराने, पहले तो उसने इलाज़ करने से मना किया और बत्तमीजी से पेस आया फिर पेसेंट ने जब sdo से शिकायत की तो इलाज़ के टाइम पता नही क्या किया नंदा ने की उसकी आँखों की रोशनी ही चली गयी

बातें हो रही थी कि नंदा को सस्पेंस कर दिया जाएगा लेकिन उससे पहले ही वो बिना बताए इस्तीफा दे कर चला गया

ऐसा दोस्त भगवान करे किसी को न दे, अहसान फरामोश निकला वो धोखेबाज़, मुझे शर्म आती है कि मेरा एएस दोस्त था

प्रभुजोत- रेस्पेक्ट भाई रेस्पेक्ट से बात करिये मेरे बड़े भाई थे वो (बनावटी हसी के साथ)

डॉ मिश्रा- जिस रेस्पेक्ट के बारे में बात कर रहे हो क्या उसके काबिल भी था वो 1 नम्बर का धोखेबाज़ ओर मतलबी इंसान था वो

प्रभुजोत ये सुन सुन के पका जा रहा था वो बहोत कंट्रोल कर रहा था, उसका चेहरा लाल हो रहा था गुस्से में उसने चाकू निकालने के लिए जेब में हाथ डाला……

कम्पाउण्डर – सर मरीज आप का इन्तेजार कर रहे हैं।

डॉ मिश्रा- शाम को घर आना साथ में डिनर किया जाएगा

प्रभुजोत – अब आना तो बनता ही है बिल्कुल आवुनगा

और मुट्ठी कस के निकल जाता है वहां से

प्रमोद बाकी टीम(अस्वनी को छोड़ कर) NGO में तफ्तीश करते है तफ्तीश में सिर्फ 1 खून से सना हुआ रुमाल मिलता है/

-प्रमोद विनायक के घर पर-

सर इधर उधर से जो सारी जानकारियां मिली उसके मुताबिक- उस डॉ का पूरा नाम रोहित नंदा है कुल 3 रोहित नंदा इस शहर में डॉ के पद पर है लेकिन मिडलैंड हॉस्पिटल में अभी कुछ दिन पहले ही 1 रोहित नंदा ने जोईनिंग की है -ठीक वो आँख वाले हमले के 1 दिन पहले तो मतलब साफ है

दूसरी घटना को अंजाम देने वाले का नाम प्रभुजोत नंदा है ।

विनायक- ह्म्म्म दोनो का सरनाम 1 ही है कहीं इन दोनों का कोई आपस में कोई कनेक्शन तो नही

-दूसरी तरफ-

डिनर रेडी है

बेल बजती है , भाभी जी गेट खोलती हैं और सामने 1 नवजवान को देखती हैं डरावनी आँखें ,चेहरे पर कटे के निशान , ब्लैक कोट पैंट, वुडलैंड के नोक वाले जूट चेहरे पर सेक्सी सी स्माइल , – आँख मरते हुए वेरी गुड इवनिंग भाभी जी ,बहोत अच्छी लग रही हैं।

भाभी जी लाल साड़ी ,लाल बिंदी माथे पर लगाये हुए

,सरमाते हुए,हाथ जोड़ कर नमस्ते करते हुए और मुसकराते हुए , अच्छा तो आप प्रभुजोत है -रोहित के छोटे भाई /

प्रभुजोत- जी भाभी

डॉ मिश्रा पीछे से- आओ हैंडसम ,डिनर भी रेडी हो गया है

डिनर टेबल पे बैठते ही , एक्चुअली हॉस्पिटल में तुम गुस्सा होने लगे थे , लेकिन सच तो सच होता है ना , रोटी और पनीर की सब्जी खाते हुए – देखो वो मेरा बहोत अच्छा मित्र था लेकिन उसने मुझे धोखा दिया …भाभी जी- लो प्रभुजोत खाना खाओ तुम भी ,आप भी ना ,खाने के टाइम बाते मत कीजिये ,खाने दीजिये न बेचारे को /

डॉ मिश्रा-जब तुम्हारे पिता जी को जेल हुई तब मैंने बहोत साथ दिया उसका ,तुम्हारी माँ का जब स्वर्गवास हुआ तब भी बहोत मदद की मैने , लेकिन भाई तुम्हारा बहोत खुदगर्ज निकला

चावल और मसूर की दाल को अच्छे से मिला कर खाते हुए

और बीच बीच मे नीम्बू पानी का सरबत पीते हुए -मै तो कभी माफ न करूं इतने नीच इंसान को , (इस बार चावल ज्यादा भर लिया मुह में) सरबत पीते हुए,(खाने की आवाज के साथ) कुत्ता भी वफादारी निभाता है ….

प्रभुजोत का हाथ चाकू को टाइट पकड़े हुये तूफान की स्पीड में चाकू डॉ मिश्रा के गर्दन को फाड् देता है, फटे गर्दन से सरबत ओर खून, थोड़ा चावल ओर दाल भी बाहर निकलने लगती है ,धीरे धीरे गर्दन ओर मुंह से मसूर की दाल खुसबू वाले चावल ,नीम्बू की खुश्बू वाला सरबत ओर खून ही खून गिरने लगता है

भाभी जी का मुख खुला है स्टेच्यू बनी टेबल से उठ कर डॉ साहब को देख रही है ,भाभी जी ने सोचा था सबके खाने के बाद वो खाएंगी लेकिन खैर……

प्रभुजोत बिना देरी किये हुए भाभी जी के बाल पकड़ कर सर को पीछे की तरफ झुका कर ताबड़ तोड़ चाकू गर्दन में घुसेड़ने लगता है लगभग आधी गर्दन गायब करने के बाद नजर जब डिनर पे जाती है तो भाभी को वहीं गिरा कर डॉ मिश्रा के सामने वाली टेबल पर बैठ जाता है ,रुमाल निकाल कर चाकू पोछ कर हाथ टेबल पर ही धूल कर चाकू पॉकेट में रख लेता है रुमाल भाभी के ऊपर डाल देता है ,आराम से अपने शर्ट की स्लीव्स मोड़ कर टाई ढीली कर के डिनर फिनिश करता है , और डॉ मिश्रा का जूठा सरबत का ग्लास उठा कर 1 ही सास में पूरा ग्लास खाली कर देता है डॉ मिश्रा अभी भी अपनी फटी गर्दन से दाल चावल निकाल रहे हैं

प्रभुजोत- घर से निकलते हुए- रेस्पेक्ट से बात करने को बोला था समझ ही नही आता ……..Next time……

प्रमोद विनायक के घर में –

प्रमोद-सर, हो न हो इन दोनों का आपस मे कोई न कोई कनेक्शन जरूर है।

विनायक- हाँ मुझे भी लगता है ,विनायक थोड़ा सोच कर सिगरेट निकालता है, ओर जला देता है

विनायक- पता नही इन लोगों के मा बाप किस तरह की परवरिश करते है

प्रमोद-सर, इफ यु डोन्ट माइंड क्या मै आप से 1 पर्सनल बात पूछ सकता हूँ?

विनायक-हाँ बिल्कुल प्रमोद ,पूछो 😊

प्रमोद- सर भाभी जी ओर आप में कोई टेंशन है क्या, एक्चुअली कई बार लगा मुझे की आप से पूछू ,बट

आप सीनियर है सो…..

विनायक- कभी कभी रिश्तों और काम के बीच मे समझ नही आता कि किसे ज्यादा टाइम दिया जाए/

प्रमोद पता है तुमसे पहले जो फील्ड एजेंट मेरे साथ था वो बहोत बुरी तरह घायल हो गया था ,लगभग 20 गुंडे लोगों से घिरे थे हम , 12 को पिस्टल फायर से ही मार दिया हम दोनों ने, उन लोगों ने मुझे 22 मंजिला बिल्डिंग से लटका दिया था, और उस फील्ड एजेंट का वो हाल किया कि मेरी हिम्मत नही हुई उसका चेहरा देखने का,

बहोत मेहनती और दिमाग वाला था वो।

बस तुम्हारी भाभी को डर इस बात का लगा रहता है कि कहीं मेरे साथ ……. तभी कॉल आती है

विनायक-नमस्कार यादव जी

यादवजी— 2 मर्डर हुए है ,यहां से लगभग 60,62 किलोमीटर दूर विसनुपुर कस्बे में, वहां की लोकल पुलिस से जो पता चला है मुझे लगता है आप के काम की चीज है

विनायक- तुरंत मेरी कॉल कॉन्फ्रेंस पे लो वहां की लोकल पुलिस से

यादव जी- ओक

कॉल कॉन्फ्रेंस पर

हलो विसनुपुर पुलिस आप की क्या मदद कर सकते हैं हम?

सीबीआई आफिस से विनायक बोल रहा हूँ और साथ मे यादव जी भी है लाइन पर/

जी विनायक जी बताईये यादव जी ने बताया था केस के बारे में

विनायक- मर्डर की जगह पर कोई सबूत मिले हैं क्या

विसनुपुर पुलिस- बस 1 रुमाल मिला है खून से सना हुआ और कुछ नहीं

विनायक- हम्म्म्म ठीक है , मुझे भी यही उम्मीद थी/ धन्यवाद आप का

विनायक प्रमोद से- ये 60किलो मीटर दूर क्यों गया, लगता है वहीं टीम भेजनी पड़ेगी/प्रमोद ऐसा करो कल तुम टीम के साथ निकल जाओ देखो क्या कहानी है आखिर ,कुछ तो पता चलेगा ही शर्दियाँ सुरु हो गयी है टीम से बोल देना कंबल और गरम कपड़े साथ ले कर जाएंगे/

उधर दूसरी तरफ़

सरकारी अस्पताल के एमरजेंसी रूम में 1 डॉक्टर के मुख से झाग निकल रहा है वोह अपने बेड के पास पड़ा तड़प रहा है पैर छटपटा रहा है उसी रूम में डॉ नंदा 1 नर्स के बाल पकड़ के खींच कर टेबल के नीचे से बाहर निकाल रहा है

नर्स रो रही है ,हाथ जोड़ते हुए बोल रही है कि मुझे छोड़ दो/ आशू पोछते हुए बोलती है कि तुम्हारे भाई के साथ सिर्फ पढ़ी थी मैं ओर कुछ नही जानती उसके बारे में /

डॉ नंदा- तुम्हारी आँखे ढीक वैसी ही है वही जानवरों जैसी जैसी मेरे भाई की थी तुमको सब पता है कि वो कहाँ है खैर पता हो या ना हो मै तुझे मार थोडो न रहा हूँ मुझे तो तेरी ये दोनों खूबसूरत आँखें चाहिए बस

नर्स रोती हुई हार मानती हुई फिर से थोड़ा तेज आवाज में बोलती है -भगवान के लिए मुझे छोड़ दो क्या रखा है इन आँखों में ,तुम्हें जितने पैसे चाहिए मए दूंगी तुम्हे लेकिन मुझे छोड़ दो प्लीज

डॉ नंदा – पैसे बहोत है मेरे पास मुझे तो आँखें चाहिए बस, ये आँखें बहोत खतरनाक ओर बहोत खूबसूरत हैं पूरे समाज से लड़ कर इन आँखों को मैने अपना माना था और इन आँखों ने ही मेरा पूरा घर बर्बाद कर दिया/

डॉ नंदा गुस्से में बोलता है -मै छोडूंगा नही अपने भाई को

नर्स चिल्लाते हुए चीखते हुए बोलती है बचाओ कोई ,कोई है बचाव मुझे/

डॉ नंदा प्लास उठा कर उसके सर पे मारने चलता है उस हाथापाई में प्लास नर्स के मंगलसूत्र में फस जाता है ।

डॉ नंदा बड़बड़ाते हुए 1 हाथ उसके मुंह पर रख कर दूसरे हाथ से मसँगलसूत्र खींचता है, मंगलसूत्र टूट जाता है ओर गर्दन पर खिंचाव का निशान पड़ जाता है

नर्स-प्लीज रहने दो मत मारो मुझे, जाने दो, मै मदद करूँगी तुम्हारी प्रभुजोत को धूड़ने………..

………. तभी अचानक से धड़ाम की आवाज आती है ओर 3,4 दांत उखड़ कर हवा में उछल कर चमचमाती हुई फर्स पर गिर कर बिखर जाते हैं

डॉ नंदा 1 बार फिर से प्लास मरता है – इस बार सर पर पड़ता है और सर के कुछ बाल प्लास उखाड़ देता है 3,4 बार फिर से धड़ाम धड़ाम की आवाज के साथ सर पर प्लास मार कर बेहोश कर देता है नर्स बेसुध हो जाती है

डॉ नंदा-बहोत बक बक करती हो ,अब शांति से मुझे अपना काम करने दो ../

Advertisements

One thought on “#Physico #Brothers

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s