मुलाकात ,#hindi_kavita ,copied

उस से मिलना तो “हाल-ए-दिल ” न बताना। तन्हा कैसे कटी “उम्र-ए-ग़ाफ़िल ” न बताना।। न मिले निगाहों से निगाह “याद ” रहे। “अज़ीम-ए-गुनाह-ए-संगदिल” न बताना।। जो पूछे हाल तो करना “ख़ैरियत ” ही बयां । “अज़ाब-ए-जख्म-ए-कातिल ” न बताना।। बिछड़ना फिर से, तो चेहरे पे “मुस्कान” रहे। “दर्द-ए-दिल-ए-बुज़दिल ” न बताना।। #मुसाफ़िर

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#Physico #Brothers

इस कहानी की सुरुआत कुछ इस तरह से होती है- 1 NGO के द्वारा खोला गया सुधार गृह जिसमे लोग आ के अपने बारे मे, अपनी दुख दर्द, अपने गलत कामो पे पछतावे पर बाते करते है ओर खुद को बेहतर इंसान बनाने की कोशिश करते है ,उस कमरे में टेबल लैंप जल रही है,टेबल […]

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